बवासीर का इंजेक्शन से इलाज: स्क्लेरोथेरेपी

ग्रेड 1 और ग्रेड 2 की बवासीर का इलाज इंजेक्शन द्वारा भी किया जा सकता है। इंजेक्शन की मदद से एक विशेष केमिकल युक्त तरल पदार्थ को पाइल्स के मस्सों में इंजेक्ट किया जाता है। यह इंजेक्शन सूजी हुई नसों के भीतर लगता है।

यह इंजेक्शन न केवल पाइल्स का इलाज करता है बल्कि, रक्त वाहिकाओं में सूजन और प्रोलैप्स से संबंधित अन्य बीमारियों को भी ठीक कर सकता है। बस आपको कुछ दिनों के अंतराल में 2-3 इंजेक्शन लेना होता है।

स्क्लेरोथेरेपी क्या है?

सरल शब्दों में कहें तो स्क्लेरोथेरेपी एक प्रक्रिया है जिसमें रासायनिक घोल को बवासीर के आसपास के क्षेत्र में इंजेक्शन द्वारा डाला जाता है। इससे बवासीर का आकार कम होता जाता है या समय के साथ सिकुड़ जाता है।

हेमोराइड इंजेक्शन के दौरान, स्क्लेरोसेंट नामक एक रासायनिक सलूशन को सीधे रक्त वाहिकाओं में डालने के बजाय पिछवाड़े के सबम्यूकोसा (आंत्र की आंतरिक परत के नीचे ऊतक का क्षेत्र) में इंजेक्ट किया जाता है।

प्रक्रिया

बवासीर के लिए स्क्लेरोथेरेपी की प्रक्रिया आमतौर पर एक गुदा रोग विशेषज्ञ द्वारा की जाती है। प्रक्रिया से पहले किसी तैयारी की आवश्यकता नहीं है और एनेस्थीसिया का उपयोग भी नहीं होता है।

प्रक्रिया की शुरुआत में सबसे पहले प्रोक्टोस्कोप या एंडोस्कोप (गुदा के भीतर देखने के लिए उपकरण) को गुदा के अंदर डाला जाएगा। इन उपकरणों को डालने से डॉक्टर बवासीर को देखने और उन तक पहुंचने में सक्षम होगा।

अब सबम्यूकोसल क्षेत्र (गुदा के भीतर का एक हिस्सा) के चारों ओर एक सुई और सिरिंज का उपयोग करके एक रासायनिक सलूशन इंजेक्ट किया जाता है, जहां पाइल्स होता है।

इंजेक्शन लगाने के बाद एक निशान ऊतक का विकास होता है जो बवासीर के आसपास के ऊतकों को सख्त कर देता है। परिणामस्वरूप पाइल्स सिकुड़ने लगता है।

इंजेक्शन लगाने में 5-10 मिनट का समय लगता है। स्क्लेरोथेरेपी की प्रक्रिया को एकसाथ 3-4 पाइल्स को ठीक करने के लिए भी उपयोग में लाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर कुछ दिन बाद दोबारा से इंजेक्शन दिए जा सकते हैं।

पाइल्स इंजेक्शन का साइड इफ़ेक्ट

बवासीर के लिए स्क्लेरोथेरेपी इंजेक्शन ट्रीटमेंट के निम्न साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं:

  • आप थोड़ी देर के लिए निम्न स्तर के दर्द का अनुभव कर सकते हैं।
  • आपको थोड़ा रक्तस्राव भी हो सकता है, लेकिन यह बिल्कुल सामान्य है।
  • पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि प्रभावित हो सकती है।
  • एलर्जी
  • मलाशय में छेद
  • भगंदर होना
  • फोड़ा का निर्माण

बवासीर के लिए एल्यूमिनियम पोटेशियम सल्फेट और टैनिक एसिड इंजेक्शन (ALTA)

बवासीर के लिए एल्यूमिनियम पोटैशियम सल्फेट और टैनिक एसिड के मिश्रण वाले इंजेक्शन (ALTA) पर एक अध्ययन हुआ। अध्ययन के परिणाम के मुताबिक़, जब आंतरिक पाइल्स के मामलों में ALTA इंजेक्शन को लगाया जाता है तो परिणाम बहुत अच्छे नजर आते हैं।

यह बिलकुल हेमोराहाइडेक्टोमी की तरह सफलता प्रदान करता है और कोई दर्द भी नहीं होता है।

बाहरी बवासीर के मामलों में या जिन्हें दोनों प्रकार का पाइल्स है, ALTA के साथ हेमोराहाइडेक्टोमी की जा सकती है। इन दोनों की संयुक्त चिकित्सा पद्धति बवासीर का बेहतरीन उपचार करती है।

जिन लोगों पर हेमोराहाइडेक्टोमी और ALTA इंजेक्शन के संयुक्त चिकित्सा का उपयोग हुआ उनमे कम दर्द, फास्ट रिकवरी और कम जटिलताएं देखी गई।

निष्कर्ष

इंजेक्शन द्वारा बवासीर का इलाज की प्रक्रिया का मेडिकल नाम स्क्लेरोथेरेपी है। जटिल मामलों में प्रक्रिया के कुछ महीना या साल बाद बवासीर दोबारा से हो सकता है।

एक अध्ययन के अनुसार बवासीर के दौरान उच्च फाइबर आहार का सेवन ठीक स्क्लेरोथेरेपी की तरह कार्य करता है। इस मकसद का उद्देश्य सूजी हुई रक्त वाहिकाओं में खून के दौड़ान को कम करके पाइल्स को सिकोड़ना है।

अधिक जटिल बवासीर का उपचार करने के लिए कई बार इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ सकती है। एक-दो सप्ताह के अंतराल में रोगी को इंजेक्शन दिए जाते हैं।

स्क्लेरोसेंट इंजेक्शन लगाने के बाद कुछ पाइल्स रोगी हल्का ब्लीडिंग और दर्द का अनुभव कर सकते हैं। कुछ को महसूस होता है कि उनके गुदा में कुछ रखा हुआ है।

इंजेक्शन वाले दिन आपको कोई भारी एक्सरसाइज या काम करने से बचना चाहिए। अगली सुबह से आप सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू करने में सक्षम होंगे।

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