माइग्रेन क्या है? प्रकार, कारण, लक्षण और उपचार

सिरदर्द मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: प्राथमिक और द्वितीयक। माइग्रेन एक प्राथमिक सिरदर्द है। मतलब कि यह अन्य सिरदर्द की तरह केवल एक लक्षण नहीं है, बल्कि खुद एक बीमारी है।

माइग्रेन आमतौर पर किशोरावस्था के दौरान शुरू होता है और 35 से 45 साल की उम्र में चरम पर होता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 213 मिलियन भारतीय माइग्रेन से पीड़ित हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं।

माइग्रेन क्या है? (Migraine in Hindi)

माइग्रेन एक प्रकार का सिरदर्द है। रोगी को सिर में कुछ धड़कता हुआ महसूस होता है और तेज दर्द होता है। शोर-शराबा या प्रकाश के संपर्क में आने से दर्द अधिक बढ़ जाता है।

माइग्रेन का दर्द इतना गंभीर हो सकता है कि आप अपनी दैनिक गतिविधियों को करने में असमर्थ हो सकते हैं। इसका दर्द घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकता है। कुछ लोगों में माइग्रेन आने पर उल्टी और मतली जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जो अनुवांशिक भी है। अनुवांशिक होने के कारण यह माता-पिता से बच्चों में भी हो सकता है। माइग्रेन से पीड़ित 60% लोगों को यह माता-पिता से विरासत के रूप में मिला होता है।

कुछ लोगों को एक महीने में कई बार माइग्रेन अटैक आ सकता है।

माइग्रेन के लक्षण (Migraine Symptoms in Hindi)

माइग्रेन चार चरणों के माध्यम से आगे बढ़ता है। प्रत्येक चरण के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं:

प्रोड्रोम (Prodrome)

यह माइग्रेन का पहला चरण है, जो आमतौर पर माइग्रेन के 1-2 दिन पहले शुरू होता है। प्रोड्रोम के लक्षण 2 घंटे से लेकर 2 दिन तक रह सकते हैं। इसके लक्षण हैं:

  • थकन और कमजोरी
  • कब्ज या दस्त
  • मूड में बदलाव
  • तेज प्यास लगना
  • बार-बार जम्हाई लेना
  • भूख बढ़ना या भूख में कमी

ऑरा (Aura)

ऑरा माइग्रेन का दूसरा चरण है। जब ऑरा आता है, तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि माइग्रेन अटैक जल्द ही शुरू हो जाएगा। इसके लक्षण हैं:

  • गंध या स्वाद में परिवर्तन
  • आवाज में बदलाव या बोलने में कठिनाई
  • धुंधली दृष्टि
  • आँखों में प्रकाश के धब्बे या चमक दिखाई पड़ना
  • त्वचा सुन्न होना
  • शरीर में झुनझुनी
  • कान में सीटी बजाना

ऑरा 5 मिनट से लेकर 1 घंटे तक रह सकता है। हालाँकि, यह सभी माइग्रेन रोगियों में नहीं देखा जाता है। कुल माइग्रेन रोगियों में से केवल 15-20% ही ऑरा का अनुभव करते हैं।

ऑरा के लक्षण प्रवर्तनीय हैं। मतलब उचित उपाय करके ऑरा के लक्षणों को रोका जा सकता है या उनकी गंभीरता को कम किया जा सकता है।

माइग्रेन अटैक (Migraine Attack)

माइग्रेन अटैक 4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक रह सकता है। इसके लक्षण हैं:

  • सिर के एक तरफ दर्द शुरू होना फिर पूरे सिर में फैल जाना
  • उल्टी और जी मिचलाना
  • सिर दर्द के साथ धक-धक होना
  • प्रकाश, शोर या गंध के संपर्क में आने से दर्द का बढ़ना

कुछ लोगों को एक महीने में 3 से 4 बार माइग्रेन के दौरे पड़ सकते हैं।

पोस्ट-ड्रोम (Post-drome)

यह माइग्रेन का चौथा और अंतिम चरण है जो माइग्रेन अटैक के खत्म होने के बाद आता है। इसके लक्षण हैं:

  • बेचैनी
  • थकान और कमजोरी
  • मांसपेशियों में दर्द
  • भूख लगना या भूख में कमी

पोस्ट-ड्रोम के लक्षण एक से दो दिन तक रह सकते हैं।

जरूरी नहीं है कि सभी रोगी माइग्रेन के चारों चरण से गुजरेंगे, अधिकांश को सिर्फ माइग्रेन अटैक आता है।

माइग्रेन के प्रकार

माइग्रेन के कई प्रकार हैं, लेकिन निम्न दो सबसे आम हैं:

  1. क्लासिक माइग्रेन: यह माइग्रेन ऑरा के साथ आता है।
  2. सामान्य माइग्रेन: इसमें सीधा माइग्रेन अटैक होता है, रोगी ऑरा के लक्षणों का अनुभव नहीं करता है।

माइग्रेन के अन्य प्रकार हैं:

  • साइलेंट माइग्रेन: रोगी ऑरा के लक्षणों का अनुभव करता है लेकिन सिरदर्द नहीं होता है।
  • एब्डोमिनल माइग्रेन: यह माइग्रेन आमतौर पर बच्चों में होता है। यह मतली, पेट दर्द और उल्टी का कारण बनता है। हालांकि, बच्चों की उम्र बढ़ने के साथ यह क्लासिक माइग्रेन में बदल सकता है।
  • क्रोनिक माइग्रेन: अगर महीने में 15 दिन से ज्यादा बार माइग्रेन आ जाए तो इसे क्रॉनिक माइग्रेन कहते हैं। क्रोनिक माइग्रेन के लक्षण बार-बार बदल सकते हैं।
  • वेस्टिबुलर माइग्रेन: वेस्टिबुलर माइग्रेन में रोगी को सिरदर्द के साथ चक्कर आते हैं और मतली का अनुभव होता है।
  • हेमिप्लेजिक माइग्रेन: रोगी के शरीर का एक भाग कमजोर या कुछ समय के लिए पैरालाइज (paralyze) हो जाता है। इसके साथ चक्कर आना और दृष्टि परिवर्तन जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
  • ओप्थाल्मिक माइग्रेन: इस माइग्रेन के कारण आंख के पिछले हिस्से में हल्का दर्द होता है, जो बाद में पूरे सिर में फैल सकता है। रोगी थोड़े समय के लिए दृष्टि खो देता है या रोगी एक आंख से स्थायी रूप से अंधा हो सकता है।

ओप्थाल्मिक माइग्रेन के लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

माइग्रेन के कारण

यह अभी तक अज्ञात है कि माइग्रेन का कारण क्या है। अध्ययनों के अनुसार, कुछ पर्यावरणीय और आनुवंशिक कारक हो सकते हैं जो इसमें भूमिका निभाते हैं।

रक्त वाहिकाओं में विशिष्ट नसें होती हैं जो मस्तिष्क को दर्द का संकेत भेजती हैं। इससे न्यूरोट्रांसमीटर रसायन, जैसे सेरोटोनिन (serotonin) और कैल्सीटोनिन जीन-संबंधित पेप्टाइड (calcitonin gene-related peptide), शरीर में रिलीज होते हैं जिससे मस्तिष्क में सूजन और दर्द होता है।

लेकिन, यह स्पष्ट नहीं है कि रक्त वाहिकाएं ऐसा क्यों करती हैं। अभी इस पर शोध किया जा रहा है।

माइग्रेन ट्रिगर

कुछ परिस्थितियां हैं जो किसी भी समय माइग्रेन ला सकती हैं। जैसे:

  • भूखा रहना: कुछ लोगों में लंबे समय तक भूखा रहने पर माइग्रेन अटैक शुरू हो जाता है।
  • हार्मोनल बदलाव: गर्भावस्था, पीरियड्स या रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जो माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं। कुछ महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने पर माइग्रेन आ जाता है।
  • नींद: कम सोने या बहुत अधिक सोने से भी कुछ लोगों में माइग्रेन की समस्या होती है।
  • खाना-पानी: बासी पनीर, नमकीन पदार्थ या बहुत अधिक शराब, कॉफ़ी और सोडा पीने से भी से माइग्रेन आ सकता है।
  • स्ट्रेस: यह माइग्रेन ट्रिगर माइग्रेन के लगभग 70% रोगियों को प्रभावित करता है। जब भी वे तनाव लेते हैं तो उन्हें माइग्रेन आ जाता है।
  • फिजिकल कारक: कुछ लोगों के लिए, व्यायाम और सेक्स माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।
  • अन्य कारक: कुछ लोगों में तेज रोशनी, तेज आवाज और तेज गंध माइग्रेन ट्रिगर की तरह काम करते हैं।

माइग्रेन के जोखिम कारक

कुछ ऐसे कारक हैं जो आपको माइग्रेन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं, जैसे:

  • उम्र: माइग्रेन आमतौर किशोरावस्था में शुरू होता है। यह 30 वर्ष की आयु के दौरान सबसे अधिक प्रभावित करता है लेकिन जैसे-जैसे आप 40 और 50 के करीब आते हैं, यह धीरे-धीरे कम होता जाता है।
  • लिंग: पुरुषों की तुलना में महिलाओं को माइग्रेन होने की संभावना 3 गुना अधिक रहती है।
  • पारिवारिक इतिहास: यदि आपके परिवार में किसी को माइग्रेन आता है, तो बहुत अधिक संभावना है कि यह आपको भी प्रभावित करेगा।

माइग्रेन का निदान

माइग्रेन का निदान करने के लिए डॉक्टर आपसे निम्न सवाल कर सकता है:

  • आपको क्या-क्या लक्षण नजर आते हैं और कितनी देर तक रहते हैं?
  • सिर के किस हिस्से में दर्द होता है और दर्द कितना गंभीर होता है?
  • क्या दर्द से साथ धक-धक भी होता है?
  • क्या आपके परिवार में कोई माइग्रेन का मरीज है?
  • आप किस तरह की दवाओं का सेवन करते हैं?

सवाल पूछने के बाद डॉक्टर रोगी का निम्न परीक्षण करवा सकते हैं:

  • ब्लड टेस्ट
  • एमआरआई (MRI) स्कैन
  • सीटी (CT) स्कैन

एमआरआई और सीटी स्कैन मस्तिष्क के अंदर की रक्त वाहिकाओं की एक विस्तृत छवि दिखाते हैं। इससे मस्तिष्क में संक्रमण, स्ट्रोक, रक्तस्राव और ट्यूमर का निदान करने में मदद मिलती है, जो माइग्रेन के स्पष्ट निदान में सहायक होता है।

माइग्रेन का इलाज (Migraine Treatment in Hindi)

माइग्रेन का इलाज दवाओं के जरिए किया जाता है। माइग्रेन के लक्षणों को रोकना और भविष्य में होने वाले माइग्रेन अटैक को टालना माइग्रेन के इलाज के दो मुख्य लक्ष्य हैं।

माइग्रेन के लक्षणों का इलाज

इसे माइग्रेन के तीव्र उपचार के रूप में भी जाना जाता है। इसमें मौजूदा माइग्रेन अटैक का इलाज निम्न दवाओं की मदद से किया जाता है:

  • दर्द निवारक: सिर दर्द को रोकने के लिए एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसे ओवर-द-काउंटर या प्रिस्क्रिप्शन दर्द निवारक दिए जा सकते हैं। हालांकि, अगर इन दर्द निवारक दवाओं को लंबे समय तक लिया जाता है, तो ये भी साइड इफेक्ट के रूप में सिरदर्द पैदा कर सकते हैं।
  • सीजीआरपी प्रतिपक्षी: सीजीआरपी प्रतिपक्षी (CGRP antagonists) दवाओं का उपयोग माइग्रेन के दर्द, मतली और प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता जैसे लक्षणों के इलाज के लिए किया जाता है।
  • डायहाइड्रोएरगोटामाइन: यह नाक स्प्रे और इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है, जिसका उपयोग लंबे समय तक रहने वाले माइग्रेन के लक्षणों के इलाज के लिए किया जा सकता है।
  • ओपिओइड दवाएं: यदि अन्य उपचार माइग्रेन के लक्षणों को दूर करने में असमर्थ हैं तो ओपियोइड दवाओं (Opioid medications) का उपयोग किया जाता है। क्योंकि इन दवाओं की लत लग सकती है, इनका उपयोग केवल डॉक्टर के निर्देशन में किया जाना चाहिए।

भविष्य में होने वाले माइग्रेन अटैक का इलाज

यह उपचार तब किया जाता है जब रोगी को बार-बार माइग्रेन का दौरा पड़ता है। इसका उद्देश्य भविष्य में होने वाले माइग्रेन की संभावना को कम करना है।

उपयोग की जाने वाली दवाएं हैं:

  • अवसादरोधी दवाएं (Antidepressants)
  • सीजीआरपी मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (CGRP monoclonal antibodies)
  • ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाएं
  • बोटॉक्स इंजेक्शन (Botox injections)

माइग्रेन से बचाव

माइग्रेन को रोकने के लिए कुछ प्रभावी उपाय किए जा सकते हैं, जैसे:

  • माइग्रेन का दौरा पड़ने से पहले आप जो कुछ भी करते हैं उसकी एक सूची बनाएं। इससे आपको अपने माइग्रेन ट्रिगर की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिससे भविष्य में होने वाले माइग्रेन से बचना आसान होगा।
  • तरल पदार्थों का सेवन करें।
  • स्ट्रेस न लें। चिंता मुक्त होने के लिए योग, ध्यान या ब्रीथिंग एक्सरसाइज करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • रोजाना व्यायाम करें।

निष्कर्ष

माइग्रेन एक सिरदर्द है जिसका कारण अज्ञात है। इसका इलाज कुछ विशेष दवाओं की मदद से किया जा सकता है। माइग्रेन के इलाज के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है।

अगर आपको कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं (जैसे किडनी की बीमारी, हृदय रोग, मधुमेह आदि) तो माइग्रेन की कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से बात करें।

ऊपर बताए गए कुछ उपचार विकल्प गर्भावस्था के लिए सुरक्षित नहीं हैं, इसलिए गर्भवती महिलाओं को इनका उपयोग करने से पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

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