धागे से बवासीर का इलाज – क्षार सूत्र विधि

आयुर्वेद में बवासीर का इलाज एक विशिष्ट तकनीक से होता है। इस तकनीक में धागे की मदद से बवासीर के मस्सों को काटा जाता है। प्राचीन समय में यह प्रक्रिया बहुत प्रचलन में थी। अब भी कई आयुर्वेद अस्पतालों में बवासीर को ठीक करने के लिए क्षार सूत्र विधि अपनाई जाती है।

आयुर्वेद की किताब के पन्नों में महान प्राचीन सर्जन शुश्रुत और चरक ने क्षार सूत्र विधि की उपयोगिता के बारे में काफी बातें लिखी हैं। इस उपचार की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि अब विदेशों के गुदा रोग विशेषज्ञ भी इस विधि को अपनाने लगे हैं।

क्षार सूत्र प्रक्रिया क्या है?

क्षार सूत्र ट्रीटमेंट बवासीर को ठीक करने की एक पैरा-सर्जिकल प्रक्रिया है जिसे एक धागे की मदद से किया जाता है। इस धागे को कई औषधियों और जड़ी-बूटी के लेप से निर्मित किया जाता है। इसमें सर्जिकल उपकरणों का उपयोग नहीं होता है।

औषधियों के प्रयोग से धागे में धागे को मजबूत बनाया जाता है ताकि यह सरलता से बवासीर के मस्सों को काट सके। इस पूरी प्रक्रिया में एक-दो महीने का समय लगता है लेकिन इलाज बहुत बेहतर होता है।

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क्षार सूत्र (धागा) कैसे तैयार होता है?

धागे से बवासीर का इलाज करने के लिए सबसे पहले धागा निर्मित करना पड़ता है। इसके लिए लिनन साइज़ 20 शल्य धागा (surgical thread) को चुना जाता है। इस धागे के ऊपर तीन औधाधियों के 21 लेप लगाए जाते हैं। यह तीनऔषधियां है:

  1. स्नुही लेटेक्स: इसे सेंहुड़ा (Euphorbia neriifolia) भी कहते हैं।
  2. अपामार्ग का क्षार: इसे चिरचिटा (Achyranthes Aspera) भी कहते हैं।
  3. हरिद्रा चूर्ण: इसे हल्दी पाउडर (Turmeric Powder) भी कहते हैं।

इन औषधियों को निम्न तरीके से धागे पर लगाया जाता है:

धागे में सबसे पहले स्नुही लेटेक्स का लेप लागाया जाता है। फिर इस धागे को क्षार सूत्र कैबिनेट में सूखने के लिए लटका दिया जाता है। लटकाने के लिए हैंगर का इस्तेमाल होता है।

क्षार सूत्र कैबिनेट में अल्ट्रावायलेट लैंप लगा होता है। अल्ट्रावायलेट किरणों की एक खासियत है कि यह जीवाणु (बैक्टीरिया, वायरस) को मार देती हैं। इससे धागे में बैक्टीरिया लगने का खतरा नहीं होता है।

धागा सूख जाने के बाद पुनः इसमें स्नुही लेटेक्स का लेप लगाया जाता है और पुनः सुखाया जाता है। इसी तरह इस प्रक्रिया को कुल 11 बार किया जाता है।

12वीं दफा धागे की कोटिंग स्नुही लेटेक्स और चिरचिटा क्षार के साथ की जाती है। धागे में स्नुही लेटेक्स का लेप लगाकर इसे अपामार्ग क्षार के पाउडर से गुजारा जाता हैं। इसके बाद धागे को धीरे से हिलाकर अतिरिक्त क्षार को गिरा दिया जाता है। इस प्रक्रिया को 7 बार दोहराया जाता है।

19वीं दफा धागे को स्नुही लेटेक्स और हल्दी पाउडर से लेपित किया जाता है। पहले धागे में स्नुही लेटेक्स का लेप लगाते हैं और फिर इसे हल्दी चूर्ण के ढेर से गुजारते हैं। इस प्रक्रिया को तीन बार किया जाता है।

इस प्रकार तीनों औषधियों को धागे पर 21 बार लपेटा जाता है। धागे को एक बार लेपित करने के बाद इसे सूखने के लिए क्षार सूत्र कैबिनेट पर रख दिया जाता है। जब यह सूख जाता है, तो इसे फिर से लेपित किया जाता है।लगभग 1 महीने में क्षार सूत्र का निर्माण होता है।

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क्षार सूत्र इलाज की प्रक्रिया

धागा तैयार हो जाने के बाद इससे बवासीर का इलाज किया जाता है। इलाज की प्रक्रिया में निम्न तीन चरण शामिल हैं:

इलाज के पहले

प्रक्रिया के एक दिन पहले प्राइवेट पार्ट के बाल साफ़ करने का निर्देश दिया जाता है। एक आयुर्वेदिक एंटीसेप्टिक क्रीम दी जाती है जिसे प्रभावित क्षेत्र में रात भर के लिए लगाना होता है।

क्षार सूत्र प्रक्रिया के लगभग 6 घंटा पहले से कुछ भी खाने से मना कर दिया जाता है।

प्रक्रिया

सबसे पहले रोगी को लोकल, जनरल या स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया जाता है। जब रोगी को मादकता महसूस होने लगती है तब बवासीर के मस्सों के आधार को धागा से कसकर बांध दिया जाता है।

धागा बंध जाने के कारण मस्सों में खून का दौड़ान रुक जाता है। लगभग 8-10 दिन में मस्से सूखकर गिर जाते हैं। लगभग 15 दिन बाद घाव भी सूख जाता है और रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है।

इलाज के बाद

इलाज के बाद चिकित्सक आपसे रेचक पदार्थों का सेवन करने को कह सकता है। भरपूर पानी पीना फायदेमंद रहेगा। एक-दो सप्ताह तक वजन उठाने से मना कर दिया जाता है।

आपको आयुर्वेदिक क्रीम या औषधियां दी जा सकती हैं जिसे मस्सों पर लगाया जा सकता है। इससे बवासीर के दर्द और खुजली से राहत मिलती है।

निष्कर्ष

क्षार सूत्र की प्रक्रिया पूर्णतः सुरक्षित है। पैरा-सर्जिकल प्रक्रिया होने के कारण इसमें किसी सर्जिकल ब्लेड का इस्तेमाल नहीं होता। इलाज के दौरान ब्लीडिंग भी नहीं होती है।

इस धागे का उपयोग न केवल बाहरी बल्कि आंतरिक बवासीर का इलाज करने में भी किया जा सकता है। उपचार के बाद कोई भी जटिलताएं उत्पन्न नहीं होती है। क्षार सूत्र ट्रीटमेंट बवासीर का स्थाई इलाज प्रदान करता है।

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