अबॉर्शन कैसे होता है? तरीका और देखभाल

अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए गर्भपात किया जाता है। अगर कोई महिला गर्भपात कराना चाहती है तो उसके मन में गर्भपात की प्रक्रिया को लेकर संशय रहता है। इस लेख में हम गर्भपात की विधि और प्रक्रिया के बारे में जानेंगे। हम यह भी जानेंगे कि गर्भपात के बाद क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और किन परिस्थितियों में महिलाएं गर्भपात करा सकती हैं।

गर्भपात क्या है? (Abortion in Hindi)

अबॉर्शन गर्भावस्था को खत्म करने की एक प्रक्रिया है। इसे गर्भावस्था की समाप्ति भी कहते हैं। अबॉर्शन के लिए सर्जरी या दवाइयों का सहारा लिया जा सकता है।

अधिकांश अबॉर्शन एमटीपी किट (MTP kit) के जरिए किए जाते हैं। इस किट में दो दवाएं होती हैं और उन दवाइयों को लेने से महिला का गर्भ गिर जाता है। यह दवाइयां आप डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं खरीद सकते हैं।

अबॉर्शन कैसे होता है? (Abortion Kaise Hota Hai)

गर्भपात दो प्रकार से किया जा सकता है:

  • मेडिकल अबॉर्शन
  • सर्जिकल अबॉर्शन

मेडिकल अबॉर्शन

मेडिकल अबॉर्शन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें गर्भावस्था को खत्म करने के लिए केवल दवा का उपयोग किया जाता है। 10 सप्ताह तक की प्रेगनेंसी को खत्म करने का यह सबसे सुरक्षित तरीका है।

मेडिकल अबॉर्शन कैसे होता है?

मेडिकल एबॉर्शन में किसी सर्जरी या एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती है। डॉक्टर महिला को गर्भपात की गोली देते हैं और खाने का समय और तरीका बताते हैं।

गर्भपात की दवा लेने के बाद महिला का गर्भाशय सिकुड़ता है और गर्भाधान का उत्पाद (Product of conception) योनि के माध्यम से बाहर निकल जाता है।

पढ़ें: गर्भपात की गोली का नाम

मेडिकल अबॉर्शन के साइड इफेक्ट

मेडिकल अबॉर्शन के निम्न साइडइफेक्ट हो सकते हैं:

  • संक्रमण
  • जी मिचलाना, उल्टी, दस्त
  • बुखार और सिर दर्द
  • पेट में ऐंठन
  • लंबे समय तक रक्तस्त्राव
  • गर्भावस्था का जारी रहना

सर्जिकल अबॉर्शन

सर्जिकल अबॉर्शन को इन-क्लीनिक अबॉर्शन या शल्य गर्भपात भी कहते हैं। यह एक प्रक्रिया है जिसमें कुछ उपकरणों की मदद से भ्रूण को गर्भ से हटा दिया जाता है।

सर्जिकल अबॉर्शन कैसे होता है?

सर्जिकल अबॉर्शन दो प्रकार से किया जाता है: 

  • वैक्यूम एस्पिरेशन (Vacuum Aspiration)

अगर महिला फर्स्ट ट्राइमेस्टर (5 से 12 सप्ताह की प्रेगनेंसी) में है तो यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में सर्जन चूषण मशीन (Suction machine) की मदद से गर्भ को खाली करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को करने में 5 से 10 मिनट का समय लग सकता है। प्रक्रिया खत्म होने के बाद महिला को उसी स्थिति में आधा घंटा आराम करना होता है।

वैक्यूम एस्पिरेशन की प्रक्रिया को आमतौर पर स्वतः गर्भपात (miscarriage) के बाद या मेडिकल अबॉर्शन के विफल होने पर किया जाता है।

  • डाइलेशन एंड एवाकुएशन (Dilation and evacuation)

सेकंड ट्राइमेस्टर (13 सप्ताह से अधिक समय की प्रेगनेंसी) में डाइलेशन एंड एवाकुएशन (D&E) की प्रक्रिया चुनी जाती है। इस प्रक्रिया में सामान्य एनेस्थीसिया का उपयोग होता है।

इसमें 10 से 20 मिनट का समय लग सकता है। प्रक्रिया सफल होने के बाद महिला को आधा घंटा आराम करने के लिए कहा जाता है।

सर्जिकल अबॉर्शन के साइड इफेक्ट

सर्जिकल अबॉर्शन के बाद निम्न साइड इफेक्ट नजर आ सकते हैं:

  • ब्लीडिंग
  • मतली और उल्टी
  • पेट में ऐंठन
  • बेहोशी महसूस होना
  • पसीना आना
  • गर्भाशय की दीवार में छेद (Uterine perforation)
  • संक्रमण

गर्भपात के बाद देखभाल और सावधानियां

अबॉर्शन के बाद जटिलताओं से बचने के लिए और जल्दी स्वस्थ होने के लिए महिलाओं को निम्न सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • भरपूर पानी पिएं।
  • समय-समय पर दवाओं का सेवन करें।
  • हल्का भोजन करें। यह सुनिश्चित करें कि पेट से संबंधित बीमारी न होने पाए।
  • गर्भपात के बाद इमोशनल अटैक आ सकते हैं। ऐसे में स्वयं को व्यस्त रखें और नकारात्मक विचार दिमाग में न लाएं।
  • पूर्ण स्वस्थ होने तक संभोग न करें।
  • बहुत अधिक ब्लीडिंग हो रही है तो इसकी सूचना डॉक्टर को दें।
  • योनि के अंदर किसी भी प्रकार की चीजें डालने से बचें।
  • कुछ दिनों तक योनि की सफाई न करें। बाथटब में न नहाएं।

डॉक्टर से कब बात करें?

गर्भपात के बाद डॉक्टर से बात करनी चाहिए, यदि:

  • 100.4°F से अधिक बुखार है।
  • लगातार ब्लीडिंग हो रही है।
  • 6 सप्ताह से अधिक समय हो गया लेकिन पीरियड शुरू नहीं हुए।
  • योनि से दुर्गन्ध आने पर या तरल पदार्थ का रिसाव होने पर।
  • योनि से खून के थक्के निकलना।
  • अचानक से गर्म और ठंड का अनुभव होना।

किन परिस्थितियों में महिलाएं अबॉर्शन करा सकती हैं?

महिलाएं निम्न परिस्थितियों में अबॉर्शन करा सकती हैं:

  • गर्भावस्था के कारण महिला का जीवन संकट में हो।
  • महिला को किसी प्रकार की बीमारी हो और गर्भपात से उसकी जान बचाई जा सके।
  • भ्रूण में किसी प्रकार का विकार मौजूद हो जो जन्म के बाद शिशु को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रभावित करे।
  • यदि गर्भनिरोधक गोलियों के असफल होने के बाद महिला गर्भवती हुई है।
  • गर्भावस्था जारी रखने से महिला के शारीरिक या मानसिक स्वास्थय पर प्रभाव पड़ता हो।
  • अगर महिला अपनी मर्जी से गर्भपात कराना चाह रही हो।
  • यदि महिला का बलात्कार हुआ है और वह गर्भवती हो गई है।

भारत में गर्भपात के क्या नियम हैं?

भारत में गर्भपात के लिए चिकित्सकीय गर्भ समापन कानून (Medical Termination of Pregnancy Act) बनाया गया है जिसमें कई चीजें विस्तार से बताई गई हैं। इस कानून के अनुसार 24 सप्ताह तक के गर्भ को हटाया जा सकता है।

12 सप्ताह तक के गर्भ को केवल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के देखरेख में हटाया जा सकता है। 12 सप्ताह के बाद अबॉर्शन कराने के लिए दो स्त्री रोग विशेषज्ञों की जरूरत होती है।

पढ़ें: गर्भपात से संबंधित सवाल-जवाब (FAQs)

निष्कर्ष

यदि महिला 10 सप्ताह तक की गर्भवती है तो आमतौर पर मेडिकल अबॉर्शन किया जाता है। यदि महिला 10 सप्ताह से अधिक समय से गर्भवती है तो डॉक्टर सर्जिकल अबॉर्शन कराने की सलाह देते हैं।

अगर मेडिकल अबॉर्शन विफल हो जाता है तो सर्जिकल अबॉर्शन का सहारा लिया जाता है।

गर्भपात एक जटिल प्रक्रिया है और इसे हमेशा अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। अबॉर्शन सफल हुआ है या नहीं यह जानने के लिए अल्ट्रासाउंड टेस्ट करा सकते हैं।

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